रविवार, 24 मई 2015

चाँदनी रात (कविता)

दीवस के समापन के बाद
अंधकार का धिरे-धिरे छा जाना।
और उनके बीच टिमटिमाते तारो का,
नजर आना।
मानो जुगनू की तरह विचरण करना।
अप्रतिम सुन्दरता को साथ लिए,
इसी बीच में खुशबुओं को विखेरती हुई।
लोगों को शीतलता प्रदान करती हुई।
मन्द मन्द धिमा प्रकाश ज्योति के सहारे।
गगन में तारों के फौज के बीच में,
मौज के साथ आनन्दित हुए।
अंधेरी रातों में ठन्ढी बयारों के बीच
चाँद ने अपनी चाँदनी को ,
पृथ्वीवासिओं को प्रदान कर रही है।
मन प्रफुल्लित सपनों में हो रहे हैं
-----@रमेश कुमार सिंह
-----०८-०४-२०१५

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